यदि मैं शिक्षामंत्री होता

संदीप कुमार

Abstract


कल्पना करना और अपने भावी जीवन के लिए मधुर स्वप्न संजोना मानव की सहज प्रवृत्ति है। एक विद्यार्थी होने के कारण जब आज मैं देश में चल रही शिक्षा पद्धिति पर नजर डालता हूँ तो मन खिन्न हो उठता है। मुझे लगता है कि आज देश में जितनी दुर्दशा शिक्षा की हो रही हैए उतनी संभवतरू किसी अन्य वस्तु की नहीं। लार्ड मैकाले ने भारत में स्वार्थवृत्ति के कारण जिस शिक्षा पद्धिति की शुरुआत कीए वाही आज तक चल रही है।कल्पनाकरनाऔरअपनेभावीजीवनकेलिएमधुरस्वप्नसंजोनामानवकीसहजप्रवृत्तिहै।एकविद्यार्थीहोनेकेकारणजबआजमैंदेशमेंचलरहीशिक्षा पद्धितिपरनजरडालताहूँतोमनखिन्नहोउठताहै।मुझेलगताहैकिआजदेशमेंजितनीदुर्दशाशिक्षाकीहोरहीहै, उतनीसंभवत: किसीअन्यवस्तुकी नहीं।लार्डमैकालेनेभारतमेंस्वार्थवृत्तिकेकारणजिसशिक्षापद्धितिकीशुरुआतकी, वाहीआजतकचलरहीहै।

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